Tuesday, November 4, 2008

विश्व स्तर पर तपेदिक रोग नियंत्रण

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लू एच औ ) के १९४८ में जनम के बाद तपेदिक का उन्मूलन विश्व स्तर पर आयोजित होने लगा। बी सी जी टीकाकरण। जो तपेदिक में प्रभावी था, विश्व स्वास्थ्य संस्था एवं यूनीसेफ की सर्वोच्च प्राथमिकता पर अंकित हो गया। १९५१ में भारतवर्ष में बी सी जी टीकाकरण पूरे जतन से किया गया। देश में आशाजनक प्रभाव प्रर्दशित भी हुए

भारत का अनपढ़ जनमानस अपनी गिरती हुई आर्थिक स्थिति एवं बढती, पेंग मरती हुई आबादी के कारन औषधियों के उपलब्ध होते हुए भी अपना उपचार संतोषजनक रूप से नहीं कर सका। अतः न केवल एक रोगी स्वयं ही निदान न प सका वरन वह सारे समाज के लिए रोग फैलाने का एक कारण व स्रोत बन गया। समय एवं उचित रूप से पूरी औषधि न ले पाने के कारन एक वीभत्स स्तिथि का जन्म भी हो गया और वह थी एम् डी आर अथवा बहु औषधि प्रतिरोधी रोग, जिनका नियंत्रण लगभग असंभव सा हो गया। प्रभावी औषधि से जो रोग सहजता से नियंत्रित हो सकता था अब पुनः एक जटिल समस्या बन कर खड़ा हो गया। यहीं पर आवश्यकता है की सरकार, मॉस मीडिया, चिकित्सक एवं समाजसेवक संयोजित होकर जन मानस को तपेदिक रोग एवं इसके विषय में वृहत सूचना प्रदान करें। Show keyboard

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